Category Archives: poem

Zindagi me nazariye badal gaye hain….

Corona pandemic has forced each of us to rethink what is important in life… Money or loved ones? Desire to conquer the world or have another peaceful and free morning… A Hindi poem for the changing attitude towards life… ख्वाब … Continue reading

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खतों के सिलसिले

  वो दिन भी क्या खूब हुआ करते थे खतों में दोस्तों से रूबरू हुआ करते थे खत भी हमारे अजीब ही होते थे लड़कपन के ऊलजलूल ख्वाबों से सजते थे यूँ ही हंसा जाते थे, तमाम बातें कह जाते … Continue reading

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वो मेरा भगवान नहीं 

वो मेरा भगवान नहीं  जो नन्ही कली का कुचलना  यूँ ही गुमसुम देखता है  वो मेरा भगवान् नहीं  जो बीभत्स दुःकर्मियों   यूँ ही हाथ बांधे रक्षा करता है  वो मेरा भगवान नहीं  यूँ ही जो अधर्म में आँखे मूंदे सोता है  … Continue reading

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कुछ लम्हे ख़ास होते हैं

कुछ लम्हे ख़ास होते हैं यूँ ही दस्तक दे, छन से बिखर जाते हैं सवाल खड़े कर जाते हैं… वह पल पहले आता तो? क्या यूँ ही गुदगुदा जाता? या तब भी ओझल हो जाता ? वक्त तब क्या करवट … Continue reading

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फिर भी..

हर दिन हों लगे चाहे सारे छप्पन भोग, पर रस-स्वाद ढूँढ़ते हैं वो लोग, हम तो लगाते अपने प्रभु को, नमक-सूखी रोटी का भोग, फिर भी हर दिन थोडा, मुस्कुरा लेते हैं हम लोग !! फीके रंग, कपड़ा ढीला या … Continue reading

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Yaari Dosti….

अमीरी गरीबी से परे हो अहं से न घिरी हो शर्तों में न बंधी हो जिंदगी के तूफानों से लड लौ जिसकी न बुझी हो दोस्ती वो निराली है नखरे उठाती नखरे दिखाती उसकी नोंकझोंक ही बडी प्यारी है गुनगुनी … Continue reading

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Tab Bhi Uljhan Hoti Thi; Ab Bhi Uljhan Hoti Hai

  रेत से बटोरी सीपी ही बचपन की दौलत होती थी सिक्कों की खनक में लेकिन अब दौलत अपनी नपती है ऊंचे आस्मां में ही बचपन की पतंग उड़ती थी अब कहाँ उस नीली छतरी को निहारने की फुर्सत होती … Continue reading

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