Tag Archives: hindi poetry

Tab Bhi Uljhan Hoti Thi; Ab Bhi Uljhan Hoti Hai

  रेत से बटोरी सीपी ही बचपन की दौलत होती थी सिक्कों की खनक में लेकिन अब दौलत अपनी नपती है ऊंचे आस्मां में ही बचपन की पतंग उड़ती थी अब कहाँ उस नीली छतरी को निहारने की फुर्सत होती … Continue reading

Posted in poem | Tagged , | Leave a comment