Tag Archives: hindi poetry

कुछ लम्हे ख़ास होते हैं

कुछ लम्हे ख़ास होते हैं यूँ ही दस्तक दे, छन से बिखर जाते हैं सवाल खड़े कर जाते हैं… वह पल पहले आता तो? क्या यूँ ही गुदगुदा जाता? या तब भी ओझल हो जाता ? वक्त तब क्या करवट … Continue reading

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फिर भी..

हर दिन हों लगे चाहे सारे छप्पन भोग, पर रस-स्वाद ढूँढ़ते हैं वो लोग, हम तो लगाते अपने प्रभु को, नमक-सूखी रोटी का भोग, फिर भी हर दिन थोडा, मुस्कुरा लेते हैं हम लोग !! फीके रंग, कपड़ा ढीला या … Continue reading

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Tab Bhi Uljhan Hoti Thi; Ab Bhi Uljhan Hoti Hai

  रेत से बटोरी सीपी ही बचपन की दौलत होती थी सिक्कों की खनक में लेकिन अब दौलत अपनी नपती है ऊंचे आस्मां में ही बचपन की पतंग उड़ती थी अब कहाँ उस नीली छतरी को निहारने की फुर्सत होती … Continue reading

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